ऋग्वेद : गाय को अघ्न्या (जिसे मारना पाप है) कहा गया है। “गावो भगः गाव इन्द्रः…” भावार्थ: गाय धन, ऐश्वर्य और सुख देने वाली है।
स्कंद पुराण (काशी खंड) : “गवां दानं महद्दानं सर्वपापप्रणाशनम्।
यत् कृतं तेन सर्वं स्यात् यज्ञो वा दानमेव वा॥” भावार्थ – गाय का दान सभी पापों का नाश कर देता है। यह यज्ञ और अन्य दानों से भी श्रेष्ठ है।
गरुड़ पुराण (पूर्व खंड, अध्याय 96) : “गोदानं मोक्षदं प्रोक्तं सर्वदानप्रमुख्यतः। सप्तजन्मार्जितं पापं गोदानादेव नश्यति॥” भावार्थ – गोदान को मोक्ष देने वाला कहा गया है। सात जन्मों के पाप भी गोदान से नष्ट हो जाते हैं।
भागवत पुराण (10वाँ स्कंध) : “गावः सर्वसुरूपेण सर्वदेवमयीः स्मृताः। गवां पूजनमात्रेण सर्वदेवसमर्चनम्॥” भावार्थ – गाय में सभी देवताओं का वास है। अतः गाय की पूजा या सेवा करना सभी देवताओं की पूजा करने के समान है।
शास्त्रों में कहा गया है कि “गाय के मुख में लक्ष्मी का वास है“।
गाय को हरा चारा, गुड़ या आटा खिलाना अन्न, धन और संतति सुख की प्राप्ति कराता है।
अथर्ववेद में कहा गया है – “जो मनुष्य गाय को अन्न देता है, उसके जीवन से दरिद्रता दूर हो जाती है।”
Feeding cows brings prosperity, wealth, and family happiness.
Atharva Veda states – “He who feeds a cow, drives away poverty from his life.”
Offering green fodder, jaggery, or flour to cows brings blessings of Goddess Lakshmi.